Jul 09

मीसम अली एण्ड कम्पनी का उद्घाटन





आज दिनांक 09/07/2017 को मीसम अली एण्ड कंपनी का उद्घाटन बाबा बर्फानी रेस्टोरेंट के बगल में हुआ। कंपनी का उद्घाटन नगर पालिका अध्यक्ष दिनेश टंडन ने अपने कर कमलों द्वारा किया।
ये हमारे लिए फ़ख्र की बात है कि हमारे ज़िले के मीसम अली ज़ैदी ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (निवासी मोहल्ला कोठियाबीर सदर जौनपुर) बनने के बाद अपने ही ज़िले की सेवा करने का फैसला किया और अपने ज़िले को ज़्यादा तरजीह दी । ये बहोत बड़ी बात होती है के व्यक्ति किसी पद पे पहुचने के बाद अपने वतन से मोहब्बत रखे और वहां की सेवा करने का विचार बनाये और सेवा करे।




हम धन्यवाद करना चाहते है सी ए साहब का के उन्होनो यह फैसला लेके हम जौनपुर वासियों के मान बढ़ाया है और ज़िले की सेवा करने का फैसला किया है।
उद्घाटन के मौके पे सैयद जाफर हसन ज़ैदी (पिता), सय्यद मुज़म्मिल ज़ैदी, सैयद अकबर हुसैन ज़ैदी एडवोकेट, दानिश इलेक्ट्रॉनिक के ओनर, जे. डी. इलेक्ट्रोनिक के ओनर, मोहम्मद तक़ी(बड़े बाबू), सैयद इंतेज़ार ज़ैदी, सैयद कलीम अब्बास ज़ैदी व अन्य लोग व फर्मो के ओनर मौजूद रहे।

 

(दानिश अलमदार)





 

Jan 22

आतंकवाद का इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं # मौलाना क्ल्बे सादिक

आतंकवाद का इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं

मजलिस को खेताब करते हुए मौलाना क्ल्बे सादिक ने कहा

जौनपुर। शहर के बाजार भुआ स्थित इस्लाम की चौक पर अनवारूल हसन की इसाले सवाब की मजलिस को आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मौलाना कल्बे सादिक ने खेताब किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आतंकवाद का इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं है। जो लोग इस्लाम के नाम पर मजलूमों का खून बहा रहे हैं। वह मुसलमान नहीं बल्कि इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं।
उन्होंने मजलिस में एक मिसाल देकर इस बात को साबित भी किया। उन्होंने कहा कि एक हिंदू और उसकी बीवी को किसी आतंकी गिरोह ने घेर लिया और कहा कि कुर्रान सुनाओ नहीं तो जान ले लेंगे। चूंकि हिंदू व्यक्ति को कुर्रान नहीं आती थी तो उसने गीता सुना दी। आतंकवादियों ने उन्हें जाने दिया। जब हिंदू व्यक्ति की बीवी ने इस बात का राज पूछा तो हिंदू ने कहा कि इन आतंकवादियों को कुर्रान नहीं आती है। यदि उन्हें कुर्रान का ज्ञान होता तो ये लोग मजलूमों का खून नहीं बहाते। मौलान ने कहा कि इस्लाम अमन का पैगाम देता है। जो लोग रसूल और उनके अहलैबेत के बताए हुए रास्ते पर चल रहे हैं। वही सही रास्ते पर हैं। इसके बाद उन्होंने कर्बला में इमाम हुसैन और उनके साथियों पर हुए मसाएब की दास्तां बयान की तो लोगों की आंखों से आंसू छलक गए। उन्होंने कहा कि कोई कितना भी जुल्म करे लेकिन किसी के घर वालों पर पानी नहीं बंद करता है। यजीद की फौज ने इमाम हुसैन के छह महीने के बेटे अली असगर तक को पानी नहीं दिया। मौलाना ने अनवारूल हसन के लिए फातिहा कराई और अंजुमन गुलशने इस्लाम ने नौहख्वानी व सीनाजनी की। मजलिस की सोजख्वानी अंसार हुसैन ने की। पेशख्वानी तनवरी जौनपुरी, ऐहतेशाम जौनपुरी और हसन जौनपुर ने की। संचालन मेहदी रजा ने किया। इस मौके पर हाजी मुबारक हुसैन, हाजी मेराजुल हसन, रईस अहमद, वसीउल हसन, अंसार हुसैन, कराम हुसैन, मोहम्मद अब्बास,जीशन हैदर, शहबाज हुसैन आदि मौजूद रहे।

Written By- Khadim Abbas Rizvi (Senior Anchor Jaunpur-e-aza.com)

 

 

Dec 26

अल्लामा तालिब जौहिरी की तबियत नासाज़

अल्लामा तालिब जौहिरी जो की उर्दू दुनिया यानि इंडिया पाकिस्तान के सबसे बड़े ज़ाकिर खतीब हैं उनकी तबियत बहुत ज़्यादा ख़राब है उन्हें कराची के आग़ा खान हॉस्पिटल में दाख़िल कर दिया गया है। उनकी सेहतयाबी की दुआएं की जा रही हैं। अल्लामा तालिब जौहिरी बुनियादी तौर से बिहार के रहने वाले है उनके वालिद मौलाना जौहर हुसैन मरहूम पाकिस्तान के बनने के बाद कराची मुंतकिल हो गए थे । मौलाना तालिब जौहरी ने पाकिस्तान से तालीमी सफर शुरू करके नजफ़ (ईराक़) का रुख किया , जहा पर उन्होंने फ़िक़्ह की तालीम हासिल की । उस वक़्त उनके हमस्रो में अल्लामा ज़ीशान हैदर जवादी मरहूम इलाहाबादी, उनसे क़ब्ल से वहाँ पर तालीम हासिल करने वालो में आयतुल्ला मौलाना महमुदुल हसन खाँ, आयतुल्ला सैयद हमीदुल हसन , आयतुल्ला सैयद शमीमुल हसन, जैसे लोग भी थे, जो की बा हयात है ।नजफ़ से तालीम हासिल करके जब पाकिस्तान वापस आए तो उस वक़्त पाकिस्तान में ज़ाकिरी के मैदान में अल्लामा रशीद तोराबी सरे फेहरिस्त थे, जिन्होंने पाकिस्तान में मरकज़ी शामे गरीबा की मजलिस कराची में क़ायम की। आज से 40 साल क़ब्ल तक जब टेलीविज़न आम नही था तो उस वक़्त रेडियो पाकिस्तान से अल्लामा रशीद तोराबी मरहूम की मजलिस और आल इंडिया रेडियो से उमदतुल उलमा मौलाना सैयद कल्बे हुसैन नक़वी(कब्बन साहब) मरहूम की आया करती थी। अल्लामा रशीद तोरबी के बाद पाकिस्तान में बैनुल अक़्वामी सतह के जो खतीब उभर कर सामने
आये उनमे अल्लमा तालिब जौहिरी मौलाना इरफान हैदर आबिदी मरहूम और अल्लमा नसीम अब्बास रिज़वी का नाम लिया जाता है। लेकिन तालिब जौहिरी साहब को नश्तर पार्क कराची की सबसे बड़ी मजलिस जिसमे लाखो का मजमा होता है, लगातार पढ़ने का शरफ़ हासिल है। अल्लमा तालिब जौहरी की मजलिसों में क़ुरानी आयात का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल होता है। इसलिए वो दानिशवर तबके में ज़्यादा पसंद किए जाते है। www.jaunpur-e-aza.com उनकी सेहतयाबी की दुआ की दरख्वास्त करती है।
By- असलम नक़वी

 

Dec 22

अल्लामा सिब्ते हुसैन नक़वी फाउंडेशन जौनपुर की जानिब से 3 दिन मजलिसो का सिलसिला

जौनपुर शिया जामा मस्जिद नवाब बाग़ के पहले इमाम -ए-जुमा आलीमुल उलेमा आयतुल्लाह-उल-उज़मा मौलाना सय्यद सिब्ते हुसैन नक़वी साहब किबला जो की 1908 से 1952 तक इमाम-ए-जुमा रहे । उनकी याद में अल्लामा सिब्ते हुसैन नक़वी फाउंडेशन जौनपुर की जानिब से मुफ़्ती हाउस मुफ़्ती मोहल्ला जौनपुर में 23,24 और 25 दिसम्बर को मजलिसे अज़ीम मुनक़्क़ीद होगी ।जिसमें हुज्जतुल इस्लाम अतहर अब्बास रिज़वी कोलकाता मौलाना सैयद कम्बर अली रिज़वी राबरेली,मौलाना सैयद कल्बे रुशैद दिल्ली, मौलाना आबिद बिलगिरामी हैदराबाद, मौलाना डॉ. कल्बे रज़ा नक़वी वैज्ञानिक ग्वालियर , मौलाना शब्बीर अली वारसी (अहले सुन्नत) तशरीफ़ ला रहे है। और इसमें दीगर शायर हज़रात भी तशरीफ़ लाएंगे।
‌इन मजलिसों का सीधा प्रसारण www.jaunpur-e-aza.com पर दिखाया जाएगा।
‌By- असलम नक़वी

 

Jaunpur Shia Jama Masjid Nawab Bagh ke pahle Imam e Juma Alimul Ulema Ayatullah ul Uzma Maulana Syed Sibte Husain Naqvi sb Qibla jo ki 1908 se 1952 tak Imam e Juma rahe unki yaad mein Allama Sibte Husain Naqvi Foundation Jaunpur ki janib se Mufti House Mufti Mohalla Jaunpur mein 23 ,24 , 25 December ko Majalis e Azeem munaqid hogi jisne HujatulIslam Maulana Athar Abbas Rizvi kolkatta Hujatul Islam Maulana Syed Qamber Ali Rizvi RaiBareli Hujatul Islam Syed Kalbe Rushaid Rizvi Delhi Maulana Abid Bilgarami Hyderabad Maulana Dr Syed Kalbe Raza Naqvi scientist Gawalier Khateeb e Ahle Sunnat Maulana Shabeer Ali Warisi Kolkata Majalis ko khitab karengeAap hazrat se shirkat ki estedwa hai..
In majaalis ka live telecast www.jaunpur-e-aza.com pe dikhaya jayega

 

Dec 16

जौनपुर के पान दरीबा मे जश्ने मरगे यज़ीद का हुआ आयोजन

जौनपुर- स्थानीय शहर के मोहल्ला बाज़ार भुआ में 15 दिसंबर को जश्ने मर्गे यज़ीद का आयोजन किया गया। इस जश्न में इमामे जुमा जौनपुर मौलाना महफुज़ूल हसन खान साहब ने सर्वप्रथम तक़रीर की । तक़रीर में बताया गया कि आज का दिन बेहद खुशी का दिन है, इस दिन नये कपड़े पहने और लोगो को मुबारकबाद दी जाये । और मौलाना ने शहर वासियों से अपील की कि इस जश्न को बड़े पैमाने पे मनाया जाये।इस मौके पर मौलाना रज़ी बिसवानी साहब और शहर के अनेकों शायर मौजूद रहे और नाज़रन-ए-अक़ीदत पेश किया और तनवीर जौनपुरी ने निज़ामत की। इस मौके पर www.jaunpur-e-aza.com के एडमिन कलीम अब्बास ज़ैदी व अन्य मौजूद रहे।
Written by मो.दानिश, रिपोर्टर jaunpur-e-aza.com

 

Dec 11

हैदर अब्बास आफताब के चालीसवे की मजलिस में उमड़ा सैलाब



जौनपुर अंजुमन गुलशने इस्लाम के अध्यक्ष ज़िले के वरिष्ठ समाजसेवी हैदर अब्बास आफताब मरहूम के चालीसवे की मजलिस रविवार को रात्रि में बारा दुअरिया मोहल्ले में संपन्न हुई । जिसमे धर्म गुरुओं के साथ साथ भारी जनसैलाब उमड़ा हुआ था ।
मजलिस को आल इंडिया शिया जागरण मंच के राष्ट्रिय अध्यक्ष मौलाना हसन मेहदी एवं विश्व प्रसिद्ध मौलाना डॉ काज़िम मेहदी उरूज ने खिताब कर लोगो से आह्वान किया कि मोहम्मद साहब और मौला अली के बताये हुए रास्ते पर चले । और गरीब असहाय , मज़लूम , बेकस की मदद के लिए हमेशा तैयार रहे । मौलाना ने मसाएब पढ़ते हुए कर्बला के प्यासे शहीद हुसैनी लश्कर के सेनापति हज़रत अब्बास अलमदार के दर्दनाक मसाएब बयान किया जिसपर लोग दहाड़े मारकर रोने लगे । बाद ख़त्म मजलिस अंजुमन गुलशने इस्लाम ने नौहा मातम किया ।
 

Dec 09

वतन वापसी की याद में निकला जुलूस !!

अहले मदीना आबिदे बीमार आते है।

बेवारिसो के क़ाफेला सालार आते है।।

बड़ागांव:- शाहगंज जौनपुर के बड़ागांव का ऐतिहासिक जुलूस-ए-अमारी का इनकाद किया गया ।कर्बला के इमाम हुसैन अ.स. का काफिला जो शाम में पूरे एक साल क़ैद रहा, उसके बाद जब काफ़िले को रिहाई मिली है। कर्बला वालो की वतन वापसी का पुरसोज़ मंज़र पेश किया जाता है। जिसमें सबसे पहले नमाज़-ए-सुबह के बाद मजलिस हुई उसके बाद ताआरूफी तक़रीर हुई ।उसके बाद जुलुस अपने क़दीमी रास्तो से होता हुआ चार रौज़े में ख़त्म हुआ। यह जुलूस लगभग 100 से अधिक वर्षो से होता रहा है।इतिहास में मिलता है कि यह जुलूस-ए-अमारी अय्यामे अज़ा के आखिरी दिन का सबसे पुराना जुलुस है।स्थानीय लोगो ने बताया कि पूरे विश्व भर में जुलूस अमारी की शुरुआत यही से हुई। इस जूलूस में पूरे हिंदुस्तान के ओलमा हज़रात व अंजुमने तशरीफ़ लाती है। पूरे देश के ज़ायरीन ज़ियारत के लिए यहाँ उपस्थित होते है और अपनी अक़ीदत का इज़हार करते है।
इस जुलूस के अंत में अंजुमन नासिरुल अज़ा बड़ागांव अपना तारीख़ी नौहा अहले मदीना आबिदे बीमार आते है.. बेवारिसो के क़ाफेला सालार आते है। और इस नौहे के साथ ख़त्म होता है।

By -Mohd Danish

Dec 06

जुलसे अमारी में पेश किया अश्कों का नजराना

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शहर के कटघरा के कर्बला से उठाया गया जुलूस

जौनपुर। शहर के कटघरा में कर्बला से अमारी का जुलूस निकला तो मोमनीन कराम ने अश्कों का नजराना पेश किया। जुलूस में शबीहे अलम और शबीहे दुलदुल भी बरामद हुआ। शहर कई अंजुमनों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी कर फात्मा को उनके लाल का पुरसा पेश किया।
इससे पहले मजलिस का आगाज सोजख्वानी से जनाब रविश साहब ने किया। इसके बाद आली जानाब मौलाना आबिद रिजवी ने मजलिस को खेताब फरमाया। उन्होंने कर्बला में शहीद हुए शहीदों का मसाएब पढ़ा तो वहां मौजूद मोमनीन की आंखों से अश्क जारी हो गए। इसके बाद शबीहे अलम और दुलदुल बरामद हुआ। फिर अमारियां बरामद हुईं। इसके बाद अंजुमन कोरापटट्टी के हमराह अंजुमन जुल्फेकारिया और तमाम अंजुमनों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी की। जुलूस कटघरा के इमाम चौक पर पहुंचकर खत्म हुआ।

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Dec 04

तीरों की बारिश में इमाम ने अदा की नमाज

कर्बला के वाकये में छिपा है कई पैगाम
शहर के कई अजाखानों में हुई मजलिस

 

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जौनपुर। शहर में इतवार को कई अजाखानों में मजलिस का एहतेमाम किया गया। बाजार भुआ के इस्लाम चौक पर इसाले सवाब की मजलिस इलाहाबाद करांरी के मौलाना जमीर हैदर ने खेताब की। उन्होंने कहा कि कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन अ.स. ने जो कुर्बानी पेश की उसमें कई पैगाम छिपे हैं। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने तीरों की बारिश में नमाज अदा करके बताया कि किसी भी हालत में हमारे चाहने वाले नमाज को न छोड़ें। जमात से नमाज पढ़ कर यह पैगाम दिया कि जब इमाम इतनी मुश्किलों के आलम में होेने के बावजूद जमात कायम कर रहे हैं तो उनके चाहने वाले बेनमाजी नहीं हो सकते हैं। बीबी जैनब ने नाकों पर नमाजे पढ़कर बताया कि उनकी मानने वाली हर औरत कैसे किरदार की होनी चाहिए।

अली अकबर का पढ़ा मसाएब
मौलाना ने जनाबे अली अकबर अ.स. का मसाएब पढ़ा तो लोगों की आंखों से अश्क जारी हो गए। उन्होंने पढ़ा कि एक जाकिरे हुसैन ने इमाम के रौजे पर शबे जुमा अली अकबर अ.स. का मसाएब पढ़ा तो मौला उसके ख्वाब में आए और कहा कि ऐ मेरे जाकिर अली अकबर का मसाएब शबे जुमा न पढ़ा कर, क्योंकि इस दिन मेरी मां फात्मा मेरे रौजे पर आती हैं। जब से मेरी मां ने अली अकबर के मसाएब सुने हैं। वह रोए जा रही हैं। मसाएब सुनकर मजलिस में बैठे तमाम लोग रोने लगे। इसके बाद अंजुमन असगरिया पुरानी बाजार ने मसाएबी नौहा पढ़ा। इसके अलावा इमामबाड़ा मरहूम मीर बहादुर अली दालान, कल्लू खां के इमामबाड़े समेत तमाम जगह पर मजलिस बरपा की गई। मजलिस के बाद तबर्रूक तक्सीम किया गया।

News Written By- Syed Khadim Abbas Rizvi

(Senior Anchor Jaunpur-e-aza.com)

Nov 27

अलम, ताबूत और दुलदुल का उठा जुलूस

अलम, ताबूत और दुलदुल का उठा जुलूस

मोमनीन कराम ने पेश किया शहीदों को पुरसा

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जौनपुर। शहर के पानदरीबा में ऐतिहासिक चार अंगुल की मस्जिद में 26 सफर का जुलूस उठाया गया। जुलूस में शबीहे अलम, ताबूत और दुलदुल बरामद किया गया।

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परचमएअब्बास (अ.स.)

जहां शहर की कई अंजुमनों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी कर के कर्बला में शहीद हुए शहीदों को खिराजएअकीदत पेश किया। इससे पहले मजलिस की शुरुआत सोजख्वानी से रबी हसन और उनके हमनवा ने की। शायरों ने कलाम पेश किया। मजलिस जोहैरकैन रिजवी करारवी ने खेताब ने किया। उन्होंने तमाम अइम्मए मासूमीन के फजाएल पेश किए। जब उन्होंने मसाएब पढ़ा तो लोगों की आंखों से आंसू जारी हो गए। इसके बाद जुलूस बरामद हुआ। जिसके हमराह शहर की तमाम अंजुमनों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी की। पहली तकरीर बेलाल हैदर और दूसरी डॉ कमर अब्बास ने खेताब की। जुलूस मीरघर के इमामबाड़े में एख्तेतमाम पजीर हुआ। इसके अलावा हुसैनिया नकी पाठक से उठाया गया। इमामे जुआ महफूजुल हसन ने मजलिस को खेतबा किया। जुलूस में शहर की तमाम अंजुमनों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी की।

News Written By- Syed Khadim Abbas Rizvi

(Senior Anchor Jaunpur-e-aza.com)

 

 




Oct 31

JAUNPURAZADARI.com का 5 साल पुरा होने का दावा निकला झुटा

जौनपुरअज़ादारी डाट काम का 5 साल पुरा होने का दावा निकला झुटा

 

जौनपुर अज़ादारी ने हाल ही मे 5 साल पुरा होने पर एलान किया पर असल मे कहानी कुछ और थी।

 

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सबूत आपके सामने है ।

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असल मे मामला ये है कि 1 वेबसाइट 5 साल पहले बनाई गई थी जो जौनपुरेअज़ा के नाम से थी जिसको सै0 कलीम अब्‍बास जै़दी ने बनाया था।

 

आज आप सभी को जौनपुरेअज़ा की शुरुवात के बारे मे विस्‍तार से बताते हैं।

 

जौनपुरेअज़ा को बनाने का जूनून असल मे इलाहाबाद से मिला मै अपनी अन्‍जुमन गुल्‍शने इस्‍लाम मे इलाहाबाद गया और वहॉ पर मैने Liveazadari.com और Allahabadazadari.com को लाईव करते हुऐ देखा
तो बस उसी दिन से ये सोच लिया की मै भी कुछ करूंगा मैने कमप्‍यूटर का नार्मल कोर्स किया हुआ था हमको वेबसाइट को बनाने के बारे मे कोई जानकारी नही थी मैने बहुत से लोगो से पता किया तो कोई 20 हज़ार तो को 40 कह रहा था
फिर मैने इन्‍टरनेट के माध्यम से सीखना शुरू किया और फिर 21/07/2011 को वेबसाइट को बनाया।
और सबसे पहला लाइव जौनपुर जूलुस का चेहलुम के दिन से चालू किया जोकि आज आप सभी की दुवा से सारे जौनपुर के जुलूस लाइव दिखाया जा रहा है
मैने वेबसाइट को बनाने मे दिन रात कर दिया रोज़ कुछ न कुछ कमी रह जाती थी और 1 दिन काम पुरा हो गया लेकिन इस काम मे मैने किसी से कोई पैसा ना तो चन्‍दे के नाम पर लिया न ही किसी ने दिया क्‍योकि हमको जौनपुर के लिए कुछ करना था और मैने कर दिखाया

मेरी वेबसाइट का टाइटल जो पहले साल रखा गया वो मेरे बडे भाई कर्रार अब्‍बास ने दिया (जौनपुर अज़ादारी अब देखेगी दुनीया सारी) ये पहले साल 2011 का था और जैसे ही ये वेबसाइट को 1 साल कामयाबी से पुरा हुआ तो फिर (जौनपुर अज़ादारी अब देख रही है दुनीया सारी )
रखा गया जो आज भी मौजूद है और हकीकत है आज जौनपुर अज़ादारी को पुरी दुनीया देख रही है

मै आप सभी के लिए पूरे साल मेहनत करता रहता हु ताकि आप सभी को बेहतर से बेहतर लाइव दिखा सकू और जब तक हयात रहेगी इस काम को अन्‍जाम देता रहुंगा

असल मे आज इस तरहा की पोस्‍ट करने का मेरा मकसद ये था कि आप सभी को सच्‍चाई बता सकू जो किसी साहब ने इसको अपना बता कर 5 साल पुरा होने का जश्न मना रहे है
मैने अपनी वेबसाइट पर जौनपुरअज़ादी की वेबसाइट से 3 पोस्‍ट कापी करके अपनी वेबसाइट पर डाला था । मेरी गलती ये थी कि मैने रिफरेन्‍स नही दिया था
और उनकी वेबसाइट पर भी कोई कापीराइट का मैसेज नही था लेकिन उन भाई साहब ने लोगो को मैसेज करना शुरू किया की जौनपुरेअज़ा वाले गलत है और वो मेरे इतिहास को अपनी वेबसाइट पर ढाल रहे है
तो मै उनसे पुछना चहाता हु कि तब आप ने अपनी वेबसाइट पर मेरे लाइव टीवी को क्‍यु लगाया था
इन साहब ने इल्‍ज़ाम लगाया है कि इस्‍लामी वेब पैसा कमाने के लिये बनाया है तो मै आप लोगो से कहना चहाता हु कि आप दोनो वेबसाइट खोलकर देखे और
फैसला करे कौन कमाने के लिए बना रहा है और कौन नही प्रचार किसकी साइट पर है मेरी या उनकी और अब तो हमको लगता है कि मेरी वेबसाइट जो गूगल पर इस मोहर्रम से नही खुल पा रही है ये भी किसी की साजिश लग रही है अल्‍ला उसको ज्‍़यादा दिन तक कामयाब नही रख पायेगा वेबसाइट जलद गूगल पर दिखने लगेगी
मै बता दू कि मैने ये वेबसाइट अपने पैसे से बनाया था लेकिन लाइव चलाने मे पैसा खर्चा होता है जैसे लैपटाप कैमरा मोडेम व नेट और भी सामान जियके लिए मैने कमेटी से उतने पैसे लिए जितने जायज़ हो ओर वो दे सके मैने 1 से 12 मोहर्रम फ्री मे चलाया है

और अब तक जौनपुरेअज़ा को 5 साल पुरे हो गऐ है आप सभी ने साथ दिया तो आगे भी एैसा करता रहूंगा

अगर मेरे पोस्ट से किसी को अच्छा ना लगा हो ताे मै माज़रत चहाता हु।

Oct 04

आयतुल्लाह अल-उज़्मा सय्यद रुहुल्ला मूसवी खोमैनी

अायतुल्लाह अल-उज़्मा सय्यद रुहुल्ला मूसवी खोमैनी (फ़ारसीروح الله موسوی خمینی), (24 सप्तम्बर, 1902 3 जून 1989) शिया मुसल्मान इमाम (अथवा मर्जा) थे। वे ईरान में जन्मे थे।ईरानी क्रान्ति के बाद, उन्होने ईरान में ग्यारह वर्ष शासन किया। वे 1979 से 1989 तक वे ईरान केरहबरे इंकिलाब रहे। उनको सन् १९७९ में टाइम पत्रिका ने साल के सबसे प्रभावशाली नेता के रूप में चुना था।

भारतीय मूल के ब्रितानी लेखक सलमान रुश्दी के ख़िलाफ़ फतवा जारी करने और कई राजनैतिक क़ैदियों को मरवाने के आदेश भी उन्होंने ही दिए।

 

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युवा रुहोल्ला
मूल और आरंभिक जीवन

रुहुल्ला खोमैनि का जन्म खोमैन शहर में हुआ था। तेहरान के दक्षिण से खोमैन ३०० किमी था। उनके पिता का नाम अयतोल्ला सय्यद मुस्ताफ़ा मुसावि था और उनकी माँ का नाम हज्जे आघा खानुम था। रुहोल्ला सैय्यद थे और उनका परिवार मुहम्मद का वंशज था वे अन्तिम इमाम (इमाम मूसा कानम) से थे। उनके दादा सैय्यद आख्मद मूसावि हिंदि, उत्तर प्रदेश के किन्तूर गांव में जन्मे थे। हिंदी 1834 मेंईरान आए और 1939 में खोमैन में घर लिया। उनकी तीसरी पत्नी, सकिने ने, मुस्ताफ़ा को १८५६ में जन्म दिया। खोमैनि के नाना मिर्ज़ा आख्मद मोज्तहेद-ए-खोंसारी जी थे। मिर्ज़ा खोंसरी मध्य ईरान में बहुत अच्छे इमाम थे।

मार्च 1903 में, पंच मास रुहोल्ला के जन्म के बाद, लोगों ने उसके पिता की हत्या कर दी[1]। रुहोल्ला की माँ व नानी ने उनको पाला। छठे साल से उनकी कुरान व फ़ारसी भाषा की शिक्षा शुरु हुई। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मुल्ला अब्दुल कसीम व शैख जफ़्फ़र के साथ हुई। रुहोल्ला की माँ व नानी का तब देहान्त हो गया जब वे 15 वर्ष के थे। इसके बाद वे अयतोल्ला के साथ रहने लगे| जब वे 18 के हुए तो ईस्लामी शिक्षा प्राप्त करने के लिये अरक मादिसे में गये। उनके गुरु अयतोल्ला अब्दुल-करिम हैरि-यज़्दि थे।

1921 में, अरक उंच्च मद्रसा, में उन्होने इस्लामी पढाई शुरु की। 1922 में उन्होने और उनके गुरु ने माद्रसा अरक छोड़ कर कोम में एक नया माद्रसा बनाया। खोमैनि ने दार-अल-शाफ़ा विद्यालय में पढाई की। इसके बाद नाजफ़, ईराक़ को चल दिये। पढाई के बाद वे फ़िख, फ़िलासफ़, सूफ़ी, व शरीअ को पढाया।

खोमैनि ने शिक्षा में राजनीति व धर्म के साथ का समर्थन किया। उनका आदर्श शासन धर्मतंत्र था।

Oct 04

आयतुल्लाह सय्यद अली हुसैनी ख़ामेनेई

आयतोल्लाह सय्यद अली हुसैनी ख़ामेनेई (जन्म १७ जुलई१९३९, मशहद, ईरान) ईरान के रहबरे इन्क़िलाब हैं। १९८१ से १९८९ तक ये ईरान के राष्ट्रपति थे।

Seyyed_Ali_Khamenei

वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल अज़्मा सैयद अली ख़ामेनई का जन्म 1939 मं ईरान के पवित्र नगर मशहद एक धार्मिक परिवार में हुआ , आप के पिता हाज सैयद जवाद ख़ामनई मशहद के वरिष्ठ धर्म गुरुओं में से थे और आप की माता एक प्रसिद्ध धर्म गुरु हुज्जतुलइस्लाम सैयद हाशिम नजफ़ाबादी की सुपुत्री थीं। शिक्षा दीक्षा वरिष्ठ नेता सैयद अली ख़ामनई ने धार्मिक शिक्षा से अपनी शिक्षा आंरभ की और 14 वर्ष की आयु में एक प्रतिष्ठित धर्म शिक्षा केन्द्र से जुड़ गये किंतु इस के साथ ही आप ने आधुनिक शिक्षा का क्रम भी जारी रखा। बाद में ईरान के पवित्र नगर और विश्व में शीआ समूदाय की धार्मिक शिक्षा केन्द्र कुम आए जहॉ इमाम ख़ुमैनी सहित नामी गुरुओं से ज्ञान प्राप्त किया। यह वही काल था जब कुम में इस्लामी गणतंत्र ईरान के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी राजशाही शासन के विरुद्ध अभियान का आरंभ कर रहे थे इस्लामी क्रांति आंदोलन जन्म ले रहा था। वरिष्ठ नेता इस पूरी प्रक्रिया में शामिल रहे। संघर्ष का आंरभ शाही सुरक्षा बलों द्वारा कुम के मदरसए फ़ैज़िया नामक शिक्षा संस्थान पर आक्रमण के बाद इमाम ख़ुमैनी ने वरिष्ठ नेता को मशहद जाकर जनता में जागरुकता उत्पन्न करने की जिम्मेदारी सौंपी । इमाम ख़ुमैनी ने पूरे ईरान में एक साथ जागरुकता आंदोलन छेड़ने की योजना बनाई थी । वरिष्ठ नेता ने ख़ुरासान प्रान्त के विभिन्न नगरों में जाकर इमाम खु़मैनी का यह संदेश पहुँचाया। वरिष्ठ नेता के लिए सरलता यह थी कि मोहर्रम का महीना आंरभ हो चुका था और लोग जगह जगह इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का शोक मनाने के लिए सभाओं का आयोजन कर रहे थे। पहली गिरफतारी: तीन मोहर्रम से आप ने भीषण देना आंरभ किया 6 मोहर्रम तक विभिन्न विषयों पर चर्चा की और कार्यक्रमानुसार सात मोहर्रम से खुल कर शाही शासन के विरुद्ध भाषण देना आरंभ कर दिया। इस दौरान धार्मिक संस्थान फैज़िया पर आक्रमण की घटना भी आपने लोगों को बताई जिस से जनता में असंतोष की लहर दौड़ गयी भाषण को बीच ही में रोक का ईरानी शासक शाह के हरकारों ने आप को गिरफ़तार कर लिया। वरिष्ठ नेता की गिफ़तारी ने खुरासान प्रान्त की जनता में शाह विरोधी भावनाओं को और अधिक भड़का दिया।

प्रथम गुव्त राजनीतिक संगठन की स्थापना: कई बार की गिरफ़तारियों के बाद वरिष्ठ नेता जब स्वंतत्र होकर कुम गयें तो वहॉ आप ने एक गुप्त राजनीतिक संस्था का गठन किया किंतु कुछ ही दिनों बाद शाही शासन को इस संस्था की भनक लग गयी और इस के कई सदस्य गिरफ़तार कर लिए गये। गिरफ़तारी आंरभ होने के बाद वरिष्ठ नेता एक वर्ष तक तेहरान में श्री हाशमी रफ़सन्जानी के घर में छिपे रहे शाही गुप्तचर सेवा को आप की खोज थी क्योंकि आप की लिखी हुई एक किताब ने भी ईरान के युवा वर्ग को अत्याधिक प्रभावित किया था। एक वर्ष की अवधि बीत जाने के पश्चात जब यह मामला कुछ ठंडा पड़ा और गिरफ़तार किए गये कई लोगों को स्वतंत्र कर दिया गया तो वरिष्ठ नेता मशहद चले गये जहॉ प्रान्त के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर आप ने लोगों को शाही शासन के अत्याचारों और भ्रष्टाचारों से अवगत कराना आंरभ कर दिया। आप की सक्रियता का दायरा बढ़ा और तेहरान में भी आप ने भाषण दिए जिस के बाद शाही शासन के विरुद्ध सशस्त्र कार्यवाही करने वाले संगठन एम के ओ ने आप से संबध स्थापित किया। एम के ओ ने 1969 से ही सशस्त्र कार्यवाही आंरभ कर दी थी। शाह की गुप्तचर संस्था सावाक ने वरिष्ठ नेता पर कड़ी नज़र रखी हुई थी क्योंकि उन्हें विश्वास था कि सशस्त्र कार्यवाहियों से वरिष्ठ नेता का संबध है इस आधार पर वरिष्ठ नेता को एक बार फिर गिरफ़तार कर लिया गया किंतु55 दिनों की कड़ी यातनाओं के बाद प्रमाण न होने के कारण आप को स्वतंत्र कर दिया गया किंतु आप की सक्रियता पर प्रतिबंध लगा दिया गया। जिस के कारण वरिष्ठ नेता ने गुप्त रुप से सक्रियता आंरभ की और सन1971 से 1974 तक यह स्थिति जारी रही । १९७२ से 1973 के दौरान आप ने अलवी आंदोलन का आरंभ किया जिस ने पूरे ईरान को अपने प्रभाव में ले लिया इस के बाद सावाकी एजेन्टों ने एक बार फ़िर वरिष्ठ नेता को गिरफ़तार किया यह उन की छठी और सब से कठिन गिरफ़तारी थी। इस्लामी क्रांति की सफ़लता और जिम्मेदारियॉं इस्लामी गणतंत्र ईरान के संस्थापक इमाम खुमैनी के ज्येष्ठ पुत्र आयतुल्लाह हाज मुस्तफ़ा ख़ुमैनी की शहादत के बाद पूरे ईरान में शाही शासन के विरुद्ध आम रोष व्याप्त हुआ जनता में बेचैनी बढ़ी और सैनिकों ने छावनियों से भागना आंरभ कर दिया। इस्लामी क्रांति की सफ़लता का यह पहला चरण था। क्रांति की सफ़लता के बाद वरिष्ठ नेता को क्रांति की उच्य परिषद में सदस्यता मिली और फ़िर रक्षा मंत्रालय में क्रांति परिषद के प्रतिनिधि का पद संभाला। जिस के बाद आप ने क्रांति संरक्षक बल सिपाहे पासदारान की कमान संभाली रक्षा की उच्य परिषद के सदस्य हुए और तेहरान के इमाम जुमा बनाए गये। सन 1980 में चुनाव आंरभ होने के साथ ही वरिष्ठ नेता संसद सदस्य निर्वाचित हुए और इसी वर्ष इराक ने ईरान पर आक्रमण कर दिया और आठ वर्षीय थोपा गया युद्ध आंरभ हो गया। जिस के दौरान वरिष्ठ नेता ने विभिन्न क्षेत्रों मे सक्रिय भूमिका निभाई सन 1981 में वरिष्ठ नेता पर एम के ओ ने घातक आक्रमण किया जिस में आप गंभीर रुप से घायल हुए इस विस्फोट में आप का दाहना हाथ निष्क्रिय हो गया। इसी वर्ष आप ने राष्टृपति चुनाव में प्रत्याशी के रुप में भाग लिया और बहुमत से इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्टृपति निर्वाचित हुए। जिस के बाद राष्टृपति के दूसरे काल में भी वरिष्ठ नेता राष्टृपति निर्वाचित हुए और दूसरा चरण समाप्त भी न होने पाया था कि इस्लामी गणतंण ईरान के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी का एक लंबी बीमारी के बाद सवर्गवास गया और वरिष्ठ नेता को उन की सिफ़ारिश और तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों के मतानुसार इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के रुप में चुन लिया गया और इस प्रकार से ईरानी राष्टृ को इमाम ख़ुमैनी जैसे महान नेता को खो देने के बाद उन्हें के मार्ग पर अग्रसर एक दूसरा महान नेता मिल गया। वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनम उस समय से आज तक न केवल ईरान के वल्कि विश्व के अन्याचार ग्रस्त व पीड़ित राष्ट्रों के समर्थक के रुप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और निभाते रहेगें।

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