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Sep 22

कारवाने अजा किताब का हुआ इजरा

 

शहर की अजादारी की तारीख किताब में है मोरत्तब

जौनपुर। शहर के बाजार भुआ मोहल्ले में मौजूद इस्लाम की चौक पर बुध को कारवाने अजा किताब का इजरा हुआ। इस किताब में शहरएजौनपुर में होने वाले तमाम जुलूसों की वाजए तारीख है। इसके अलावा उलमाए कराम से लेकर सोजखां तक के नंबरों की भी डिटेल दी गई है। किताब में दी गई जानकारी जौनपुरी की अजादारी के लिए बहुत ही अहम है। ऐसा पहली बार हुआ कि अजादारी के सिलसिले से किसी ने कोई किताब छापी हो। रस्मएइजरा से पहले इमामाबाड़ा में एक मजलिस भी हुई। जिसको इमामएजुमा मौलाना महफूजुल हसन ने खेताब किया।

Shekh Jafar Ali

 

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मौलाना महफूजुल हसन ने मजलिस को खेताब करते हुए कहा कि इमाम हुसैन की अजादारी मनाना हम सब पर फर्ज है। इमाम हुसैन ने कुर्बानी पेश करके पूरी इंसानियत को बचा लिया। यजीद इंसानियत को खत्म करना चाहता था। यही वजह है कि इमाम हुसैन का मातम हिंदुओं के अलावा तमाम मजहब के लोग करते हैं। मजलिस में मौलाना ने कर्बला में इमाम हुसैन और उनके साथियों पर हुए जुल्म की दास्तां बयान किया और इसके बाद रस्मएइजरा की शुरुआत हुई। रस्म में इजरा में सबसे पहले किताब के लिखने वाले शेख जाफर अली रविश जौनपुरी ने किताब के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह किताब उनकी तीन साल की मेहनत है। तीन साल तक लगातार उन्होंने मेहनत की और जौनपुर में हो रहे जुलूस, शब्बेदारियों समेत तमाम जानकारी इकट्ठा की और उसके बाद उसे किताब की शक्ल दी। इस किताब में मोहल्लों की जानकारी, अय्यामे अजा के जुलूस, एजाजी चेहल्लुम, शब्बेदारियां, जियारतगाह, उलमाए कराम के नाम मोबाइल नंबर समेत तमाम चीजें दी गई हैं। इसके बाद मोहम्मद हसन ने किताब पर रौशनी डाली। उन्होंने कहा कि रविश जौनपुरी ने जो तीन साल तक मेहनत की है। इसके लिए उन्होंने मैं मुबारकबाद देता हूं। क्योंकि यह काम आसान नहीं था। रस्मएइजरा में मौलाना सफदर हुसैन जैदी, मौलाना अली रजा, हाजी असगर हुसैन, हाजी कैसर नवाब समेत तमाम अंजुमनों के मेंबर मौजूद रहे। निजामत असलम नकवी ने किया।