Sep 11

ईद-ए-गदीर पर निकला शाही जुलूस शायरों ने पेश किया नजराने अकीदत




ईद-ए-गदीर के मौके पर अदा की गई नमाज

जौनपुर। ईद-ए-गदीर के मौके पर इतवार को शिया समुदाय के लोगों ने जश्न मनाया। घरघर बेहतरीन पकवान बने और लोगों ने नज्र दिलवाई। लोगों ने एकदूसरे से गले मिलकर ईदएगदीर की मुबारकबाद पेश की। वहीं शहर की शाही चार अंगुल की मस्जिद और हैय्या अला ख़रील अमल से से ईदएगदीर के मौके पर शाही जुलूस निकाला गया। इस दौरान भारी तादाद में शिया आशना अशरी ने जुलूस में शिरकत की। जगहजगह जुलूस का इस्तकबाल किया गया। जुलूस में मौजूद शायरों ने नजराने अकदीत पेश की। इससे पहले उलमाए कराम ने ईदएगदीर पर रौशनी डाली और लोगों ने ईदएगदीर पर मखसूस नमाज अदा की।

 




Eid-e-Ghadeer Jaunpur

Eid-e-Ghadeer Jaunpur





इतवार को चार अंगुल की मस्जिद और मस्जिद हैय्या अला ख़ैरिल अमल में ईदगदीर के खास मौके पर मौलाना जोहैरकैन करारवी की कयादत में जश्न मनाया गया। मौलाना डॉ. गुलजार अहमद ने ईदएगदीर की मखसूस नमाज अदा कराई। इस दौरान सैकड़ों की तादादमें लोगों ने नमाज अदा की और मुल्क में अमनचैन और तरक्की की दुआ की। मौलाना जोहैरकैन करारवी ने ईदएगदीर पर रौशनी डालते हुए कहा कि आज ही के दिन 1400 वर्ष पहले मोहम्मद साहब ने अपने भाई, दामाद और पहले इमाम हजरत अली को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। उन्होंने बताया कि हज से लौटते वक्त मोहम्मद साहब ने गदीर के मैदान में करीब सवा लाख हाजियों के बीच हजरत अली के जानशीन बनने का ऐलान किया था। साथ ही उन्होंने कहा था कि हमारे बाद हजरत अली ओर उनके जानशीन के बताए हुए रास्ते पर चलोगे तो हमेशा अमन से रहोगे। मौलाना ने अपनी तरकीर में कहा कि आज यदि दुनियाभर में इस्लाम को आतंकवाद से जोड़ा जा रहा है, तो इसकी वजह यह है कि मुसलमानों ने हजरत अली का दामन छोड़ दिया। ईदएगदीर की मखसूसी नमाज के बाद चार अंगुल की मस्जिद से जुलूस निकला। जुलूस हाजी नूर मोहम्मद के आवास, अकबर का इमामबाड़ा, इमामबाड़ा मीर बहादुर अली मरहूम से होता हुआ इस्लाम की चौक पर खत्म हुआ। इस दौरान यहां पर तबर्रुक तक्सीम किया गया। दोनो ही जुलूस इस्लाम की चौक पर खत्म हुआ। जुलूस में शायर रविश जौनपुरी, हसनैन, तालिब जौनपुरी, मशरकैन जौनपुरी, रजी जौनपुरी, शमशाद जौनपुरी, एहतेशाम जौनपुरी, तालिब जौनपुरी, मोहम्मद जौनपुरी के अलावा दीगर शायरों ने एक से बढ़कर एक शेर पेश कर मौला अली को खिराजएअकीदत पेश की। मस्जिद हैय्या अला ख़ैरिल अमल में मौलाना हसन जफर ने तकरीर की। दोनो जगह पर हाजी असग़र हुसैन, कबीर ज़ैदी, हाजी हसन जाफर,

मोहम्मद जान, लाडले हसन, मौलाना बाकिर मेहदी, मीसम, जफ्फू भाई, अली मोहम्मद, बेचू भााई, इम्तियाज, जहीर, शाहिद और कौम के तमाम लोग मौजूद रहे।